August 31, 2026

 

(अमित श्रीवास्तव, देहरादून)

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज सचिवालय में पुलिस विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मानव एवं बाल तस्करी की रोकथाम, साइबर अपराधों से निपटने, नारकोटिक्स के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, इन्वेस्टीगेशन में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग तथा डिजिटल पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उन्होंने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामलों में मैदानी क्षेत्रों सहित पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस विभाग के पोर्टल का शीघ्र एकीकरण किया जाए। उन्होंने इसके लिए दोनों विभागों के मध्य समन्वय के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती भी शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने लापता बालिकाओं एवं नाबालिग बच्चों को ट्रेस करने के लिए टीम एवं मजबूत तंत्र विकसित करने तथा अनट्रेस्ड बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच डेटा शेयरिंग और बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने ऑपरेशन स्माइल का नवीनतम डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि मानव एवं बाल तस्करी के केसों का मामलानुसार विश्लेषण किया जाए। उन्होंने कहा कि तस्करी के नेटवर्क एवं संगठित मामलों की पहचान कर उनकी रोकथाम के लिए प्रभावी एवं मजबूत तंत्र विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पीड़ितों का रेस्क्यू करने के बाद उनके पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पीड़ितों को उनके अभिभावकों को सुरक्षित रूप से सौंपे जाने तक प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने रेस्क्यू मैकेनिज्म को और मजबूत करने तथा जिला स्तर पर पृथक टीम एवं व्यवस्थाएं विकसित करने के निर्देश दिए।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए मुख्य सचिव ने साइबर पुलिसिंग की मैनपावर को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर एक्सपर्ट्स के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता बताई, ताकि साइबर अपराधों के मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य सचिव ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के अंतर्गत प्रभावी कार्रवाई के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनकॉर्ड की बैठक में इस सम्बन्ध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किए जाने को कहा।

उन्होंने कहा कि पुलिस इन्वेस्टीगेशन में टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने विवेचना अधिकारियों को आवश्यक इन्वेस्टीगेशन किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि विवेचना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे थानों जहाँ अधिकतर एफआईआर दर्ज होती हैं, उन थानों में इन्वेस्टीगेशन विंग खोली जा सकती है। उन्होंने ई – एफआईआर के रिजेक्शन का विश्लेषण एवं क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के निर्देश भी दिए। साथ ही न्यायश्रुति, एफएसएल, मालखाना एवं डायल 112 को शीघ्र लाइव करने तथा ई – समन के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने आईसीजेएस 2.0 साइट्स पर नेटवर्क कनेक्टिविटी की स्थिति की समीक्षा करते हुए कमजोर कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में नेटवर्क एवं बैंडविड्थ बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि डिजिटल पुलिसिंग की व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और जनोन्मुख बनाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, डेटा शेयरिंग, आधुनिक तकनीक का उपयोग और जिला स्तर पर मजबूत मैकेनिज्म विकसित किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि थानों का अधिकतम स्थान सीज गाड़ियों से भरा रहता है। इससे थानों जगह की कमी की समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने थानों में सीज गाड़ियों को डिस्पोज ऑफ़ करने के लिए डिजिटल स्टोरेज पर जाने के निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव गृह शैलेश बगौली, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, आईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे, आईजी सुनील कुमार मीणा, एसएसपी तृप्ति भट्ट एवं अजय सिंह उपस्थित थे।

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