May 1, 2026

 

(अमित श्रीवास्तव, देहरादून)

देहरादून। मुख्य सचिव, आनन्द बर्द्धन ने आज सचिवालय में जल संरक्षण के लिए गठित स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन अथॉरिटी (सार्रा) द्वारा कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने सार्रा द्वारा जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कराए जा रहे कार्यों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सार्रा को अगले एक वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी नदियों पर एक साथ कार्य करने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित नदियों पर कार्य शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि टिहरी जनपद में बनाए गए चेकडैम की श्रृंखला की तर्ज पर अन्य जनपदों में भी कार्य किया जाए। उन्होंने चेकडैम के मेंटेनेंस और डेसिलटिंग को भी अपनी योजना में शामिल किए जाने पर जोर दिया।

उन्होंने ग्राउण्ड वाटर रीचार्ज के अंतर्गत चिन्हित कार्यों को 30 जून, 2026 तक पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कराए जा रहे कार्यों को जल संचय जन भागीदारी पोर्टल पर अपलोड भी किया जाए।

इस दौरान बताया गया कि उत्तराखण्ड में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीविकरण को लेकर सार्रा की पहल अब तेजी पकड़ रही है। “वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर” योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में नदियों, धारा-नौला और भूजल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य वैज्ञानिक पद्धति से किया जा रहा है। राज्य में अब तक 5,775 जल स्रोतों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें 2,664 स्प्रिंग, 1,701 नौले और 1 282 क्रिटिकल स्ट्रीम्स शामिल हैं। सार्रा के तहत स्थानीय समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर समितियों का गठन कर लोगों को जल स्रोतों के संरक्षण, पौधरोपण और जल बचत के प्रति जागरूक किया जा रहा है। राष्ट्रीय संस्थानों का भी तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है।

इस अवसर पर अपर सचिव हिमांशु खुराना एवं कहकशा नसीम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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