May 3, 2026

देहरादून। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में भूमि धोखाधड़ी से जुड़े कुल 125 मामलों पर सुनवाई की गई। जिनमें 20 पुराने और 105 नए मामले शामिल थे।

समीक्षा के दौरान समिति ने कुल 45 मामलों का निस्तारण किया। तो वहीं 24 गंभीर मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। लैंड फ्रॉड समिति में दर्ज नए मामलों में सबसे अधिक देहरादून के 74 मामले है। जबकि हरिद्वार के 15, पौड़ी के 13, टिहरी के दो और चमोली का एक मामला शामिल है।

भूमि धोखाधड़ी नहीं की जाएगी बर्दाश्त

गढ़वाल आयुक्त ने ये साफ किया कि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

जिन प्रकरणों में संयुक्त निरीक्षण अपेक्षित है, उन्हें इसी सप्ताह पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि लैंड फ्रॉड कमेटी की बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि हर 15 दिनों के अंदर लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा की जा रही है।

बैठक में कुल 125 मामलों पर सुनवाई

इसी बीच बैठक में कुल 125 मामलों पर विचार किया गया। जिनमें 20 लंबित और 105 नए मामले शामिल थे। इनमें से 24 मामले काफी गंभीर पाए गए। जिनमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

24 मामलों में एफआईआर दर्ज

जांच में कई चौंकाने वाले बातें भी सामने आई हैं। कहीं बिना जमीन के ही बिक्री, कहीं खसरा नंबर में हेरफेर कर अलग भूमि देना, तो कहीं 2 बीघा भूमि को 4 बीघा बताकर बेचना जैसे गंभीर फर्जीवाड़े उजागर हुए हैं।

आयुक्त ने ऐसे मामलों में पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त भूमि धोखाधडी, अवैध कब्जा और गंभीरता वाले अन्य 11 मामलो पर भी आयुक्त ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए है।

45 अन्य मामलों का भी निस्तारण

वही आयुक्त ने बताया कि 45 अन्य मामलों का भी निस्तारण किया गया है। इनमें कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है। कुछ में लेन-देन की समस्या प्रशासनिक हस्तक्षेप से सुलझ गई और धनराशि वापस कर दी गई। वहीं, कुछ प्रकरण सिविल न्यायालय में लंबित पाए गए। जिनमें बेनामा निरस्तीकरण से संबंधित विवाद हैं। इनमें लैंड फ्रॉड नहीं पाया गया। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निस्तारण विधिवत न्यायालय के माध्यम से ही होगा।

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