
“प्रजेंटेशन में नहीं, धरातल पर दिखें सकारात्मक परिणाम”, 4 साल से लटके मसूरी और अर्केडिया एसटीपी प्रोजेक्ट पर भड़के जिलाधिकारी, मसूरी संयुक्त मजिस्ट्रेट को सौंपी जांच
(अमित श्रीवास्तव, देहरादून)
देहरादून। कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में जिला गंगा संरक्षण समिति और अर्द्धकुंभ मेला 2027 की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान का बेहद कड़ा रुख देखने को मिला। जिलाधिकारी ने जनपद में संचालित गंगा संरक्षण, सीवरेज, नाला टैपिंग और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि सरकारी कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लापरवाही पर लगी क्लास
अनुपस्थित अधिकारी को नोटिस, प्रोजेक्ट्स पर नाराजगी
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने ढीली कार्यप्रणाली पर अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और कई कड़े निर्देश जारी किए।
अफसर को कारण बताओ नोटिस
नगरीय क्षेत्रों में डेयरी वेस्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण जानकारी मांगे जाने पर नगर निगम देहरादून के संबंधित अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई और उनके खिलाफ तत्काल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने के आदेश दिए।
4 साल से लटके प्रोजेक्ट पर जांच
मसूरी के कैमल बैक में 0.70 एमएलडी और अर्केडिया जोन में प्रस्तावित 0.70 एमएलडी क्षमता के एसटीपी (एसटीपी) प्रोजेक्ट्स के लिए वर्ष 2022 में बजट और स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक काम शुरू न होने और भूमि म्यूटेशन लंबित रहने पर डीएम ने कड़ा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी को पूरे मामले की जांच सौंपकर 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
टपकेश्वर एसटीपी में देरी पर नाराजगी
टपकेश्वर मंदिर (गढ़ी कैंट) क्षेत्र में प्रस्तावित एसटीपी निर्माण के लिए भूमि चयन में हो रही देरी पर भी उन्होंने नाराजगी जताते हुए इसे शीघ्र पूर्ण करने को कहा।
एनजीटी मानकों का पालन और फ्लड जोनिंग का अपडेट, एसटीपी के लिए कड़े निर्देश
जल संस्थान और पेयजल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जनपद के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही संचालित होने चाहिए। बिंदाल नदी में गिरने वाले प्रदूषित नालों की टैपिंग का कार्य भी समय पर पूरा करने के आदेश दिए।
फ्लड जोन चिन्हीकरण
बैठक में बताया गया कि गंगा नदी (हरिद्वार तक), रिस्पना और आसन रिवर का फ्लड जोन चिन्हीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि सुसवा, सौंग, जाखन, चंद्रभागा और यमुना का सर्वे कर लिया गया है। डीएम ने इसे समयबद्ध तरीके से अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।
स्वच्छता व्यवस्था में तकनीकी निगरानी: डंपिंग जोन में लगेंगे सीसीटीवी
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए जिलाधिकारी ने सभी नगर निगमों और निकायों को अपशिष्ट प्रबंधन सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।
कूड़ा उठान व्यवस्था को प्रभावी बनाते हुए डंपिंग जोन को चिन्हित किया जाए और वहां सीसीटीवी कैमरों व अन्य तकनीकी माध्यमों से कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
नगर पंचायत सेलाकुई में स्लज वाहन उपलब्ध न होने पर हैरानी जताते हुए अधिकारियों को तत्काल अपने संसाधनों से वाहन की व्यवस्था करने के आदेश दिए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) नीरज शर्मा, ऋषिकेश के नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल सहित पर्यावरणविद् विनोद जुगलान और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।





